भीण्डर में सिद्धचक्र महामण्डल विधान में समाजजनों ने की विशेष पूजा-अर्चना
Bhinder@VatanjayMedia
भीण्डर के जैन समाज के सिद्धचक्र महामण्डल विधान एवं विश्व शान्ति महायज्ञ के तहत विविध अनुष्ठान जारी है। समाज प्रवक्ता इन्द्रलाल फान्दोत ने बताया मंगलवार सुबह मुनि अपूर्व सागर महाराज, मुनि अर्पित सागर महाराज, मुनि विवर्जित सागर महाराज एवं प्रतिष्ठाचार्य पण्डित अरविन्द जैन व बाल ब्रह्मचारी नमन भैया के दिशा निर्देशन में विधान के पांचवें दिवस पर सभी इन्द्र-इंद्राणियों एवं श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति में पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन हुआ।
अभिषेक व शांतिधारा का सौभाग्य ललित कुमार, निलेश कुमार, सचिन उदयपुरिया परिवार, सुमति लाल, हितेश कुमार, विशाल लिखमावत परिवार, मुनिश्री ससंग के पाद प्रक्षालन गोटी लाल जम्बूकुमार लूणदीया एवं जिनवाणी भेंट सुमति लाल बेबी देवी डवारा द्वारा की गई।
सैकड़ों भक्तों ने सुबह 7 से 1 बजे तक पुरी चेतना व आनन्द नृत्यगान के साथ सिद्ध परमात्मा के चरणों में श्रीफल अर्घ्य समर्पण किये। विधान में 25 प्रकार के फलों से कविता पदम पाटनी परिवार और मायादेवी सुशील गोठाने परिवार ने विशेष अर्चना की।
सांयकाल धर्म सभा में आदिनाथ भगवान, नन्दीश्वर भगवान, सिद्धचक्र की बहुत ही भक्ति से आरती होती है। प्रश्नमंच व विद्वानों को प्रवचन होते है। दिगम्बर जैन समाज के सर्वोच्च आचार्य शांतिसागर गुरुदेव के जीवन पर आधारीत फिल्म दिखाई गई।
विधान के अवसर पर मुनि अपूर्व सागर महाराज ने कर्म दहन विधान की आहूती के समय बताया कि मानव को अपने पूर्व कर्मों का फल स्वयं को भोगना होता है। अपने अच्छे कर्मों का फल अच्छा मिलता है। बुरे कर्मो का फल बुरा मिलता है। सन्त कहते कर्म किये जा फल की इच्छा मत कर इंसान।
पापों को छोड़ो। किसी का दिल मत दुखाओं, इमानदारी से व्यापार करो। गरीबों का खून मत चूसो । शराब व जुआ खेलना नरक में ले जाने वाला है। पराई स्त्री पर गलत निगाह मत रखो। इन्सान बनो हैवान मत बनो।
प्राणी मात्र से मैत्री, प्रेम, सद्भावना, भाईचारी का व्यवहार करें। सबसे मधुर व्यवहार करे। जरूरतमंद की सहायता करना। गो रक्षा करने में अपनी लक्ष्मी का सदुपयोग करना। अंत सभी भक्तों मुनि संघ मंगल आशीर्वाद दिया।
ADVT
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