Bhinder@Vatanjaymedia
गुरुवार की शाम जैसे ही आराध्यदेव ठाकुरजी नृसिंह भगवान शेषनाथ सिंहासन पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए निकले, पूरा भीण्डर भक्ति और उल्लास के रंग में रंग गया। गलियों से लेकर मुख्य बाजार तक एक ही स्वर गूंज रहा था नृसिंह भगवान की जय। सड़क किनारे खड़े बुजुर्ग हों या छतों पर उमड़ी महिलाएं और बच्चे, हर किसी की नजर ठाकुरजी की एक झलक पाने को आतुर दिखी। जैसे ही चांदी के बेवाण में सजे ठाकुरजी आगे बढ़े, श्रद्धालुओं ने फूलों की बारिश शुरू कर दी। कई जगहों पर लोगों ने सचमुच पलक-पावड़े बिछाकर अपने आराध्य का स्वागत किया।
भक्ति में डूबा भीण्डर, हर गली बना स्वागत द्वार
नगर के प्रमुख मार्ग सर्राफा बाजार, रावलीपोल चौक, सदर बाजार, मोचीवाड़ा, बाहर का शहर, रामपोल बस स्टेण्ड, हॉस्पिटल रोड, सूरजपोल हर जगह रंग-बिरंगे स्वागत द्वार सजे हुए थे। कई स्थानों पर युवाओं की टोलियां ढोल-नगाड़ों और बैण्डबाजों की धुन पर नृसिंह भजनों में झूमती नजर आईं। ऊंट, अश्व और सजी-धजी बग्गियों में भगवान राम, कृष्ण और नृसिंह की झांकियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। छोटे-छोटे बच्चे भी मेवाड़ी पाग पहनकर इस भक्ति यात्रा का हिस्सा बने।
श्रद्धालुओं की सेवा भावना ने जीता दिल
शोभायात्रा में सबसे खास बात रही कि श्रद्धालुओं की सेवा भावना। कई जगहों पर युवाओं ने स्वयं आगे आकर बेवाण के मार्ग की सफाई की, फूल बिछाए और प्रसाद व जल की व्यवस्था संभाली। स्थानीय लोगों का कहना था कि यह सिर्फ शोभायात्रा नहीं, हमारे विश्वास और परंपरा का उत्सव है, जिसमें हर कोई अपनी भूमिका निभाता है।
रघुनाथ द्वारा चौक पर जीवंत हुआ नृसिंह अवतार
शोभायात्रा जब रघुनाथ द्वारा चौक पहुंची, तो यहां माहौल एकदम अलग ही रूप ले चुका था। मंच पर नृसिंह अवतार, भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप वध का नाट्य मंचन हुआ। जैसे ही नृसिंह भगवान का प्रकट होने का दृश्य सामने आया, भीड़ में सन्नाटा और रोमांच एक साथ महसूस हुआ और अगले ही पल जयकारों की गूंज से पूरा चौक थर्रा उठा। सैकड़ों लोग इस दृश्य के साक्षी बने और देर तक तालियों और जयघोष से माहौल गूंजता रहा। यहां से नृसिंह भगवान का बेवाण मन्दिर पहुंचा, जहां पर भव्य आरती की गई।
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