भीण्डर नगर पालिका में पट्टा मांगना हुआ दूभर, फरियादी काट रहे हैं पुलिस थाने के चक्कर

भीण्डर नगर पालिका में पट्टा मांगना हुआ दूभर, फरियादी काट रहे हैं पुलिस थाने के चक्कर

पट्टा मांगने पहुंचे व्यक्ति पर ईओ ने दर्ज कराया मामला, अब फरियादी ने भी रिश्वत मांगने, अभद्रता के आरोप की दी रिपोर्ट

Bhinder@Vatanjaymedia

भीण्डर नगर पालिका में प्रशासक काल लागू होने के बाद आमजन को राहत मिलने के बजाय परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पट्टा जैसे महत्वपूर्ण कार्य को लेकर अब हालात ऐसे बन गए हैं कि कार्यालय में समाधान होने के बजाय मामले पुलिस थाने तक पहुंच रहे हैं। नगर पालिका में पट्टा बनवाने पहुंचे एक व्यक्ति और अधिशासी अधिकारी (ईओ) के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतें दर्ज करा दीं। ऐसे में अब पट्टे की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बजाय दोनों पक्ष पुलिस और प्रशासन के समक्ष अपने-अपने आरोपों को साबित करने में लगे हुए हैं।

पट्टे के लिए पहुंचे फरियादी ने लगाए गंभीर आरोप

भीण्डर निवासी सूरजमल यादव ने भीण्डर पुलिस थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि वह 18 जून 2026 को वार्ड संख्या 24 स्थित अपने मकान का पट्टा बनवाने के लिए नगर पालिका में आयोजित शिविर में आवेदन लेकर पहुंचे थे। उनका आरोप है कि अधिशासी अधिकारी के कक्ष में फाइल प्रस्तुत करने पर उनसे कथित रूप से अवैध राशि (रिश्वत) की मांग की गई। यादव का कहना है कि उन्होंने सरकारी योजना के तहत आवेदन करने और सभी आवश्यक दस्तावेज पूरे होने की बात कही, लेकिन इसके बावजूद पट्टा नहीं बनाने की बात कही गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अधिशासी अधिकारी ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया, जातिसूचक शब्द कहे, फाइल फेंक दी, चेंबर से बाहर निकाल दिया तथा झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

ईओ का पक्ष – राजकार्य में बाधा और अभद्र व्यवहार का आरोप

वहीं दूसरी ओर नगर पालिका भीण्डर के अधिशासी अधिकारी जितेन्द्र कुमार मीणा ने भीण्डर पुलिस थाने एवं उपखंड अधिकारी को दिए गए पत्र में अलग ही घटनाक्रम बताया है। ईओ के अनुसार 1 जुलाई 2026 को सूरजमल यादव नगर पालिका सभागार में आयोजित शहरी सेवा शिविर के दौरान पहुंचे और वहां अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया। उनका आरोप है कि फरियादी का व्यवहार आक्रामक था, जिससे शिविर में चल रहे राजकीय कार्य में बाधा उत्पन्न हुई। ईओ ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि सूरजमल यादव जिस पट्टे की फाइल का उल्लेख कर रहे थे, उसकी जानकारी लेने पर भूमि शाखा में ऐसी कोई पत्रावली उपलब्ध नहीं मिली। साथ ही दावा किया गया कि 18 जून 2026 को शिकायतकर्ता नगर पालिका कार्यालय आया ही नहीं था तथा उस दिन पट्टे को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ। उन्होंने शिकायत को तथ्यहीन, निराधार एवं राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए संबंधित व्यक्ति के खिलाफ राजकार्य में बाधा डालने और झूठे आरोप लगाने के मामले में कार्रवाई की मांग की है।

पट्टा प्रक्रिया से भटककर विवाद में उलझा मामला

नगर पालिका में पट्टा वितरण जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया अब विवादों के घेरे में आ गई है। एक ओर फरियादी रिश्वत मांगने, अभद्र व्यवहार और जातिसूचक टिप्पणी के आरोप लगा रहा है, तो दूसरी ओर नगर पालिका प्रशासन राजकार्य में बाधा पहुंचाने और कर्मचारियों से अभद्रता करने के आरोप लगा रहा है। दोनों पक्षों के पुलिस तक पहुंचने से मूल उद्देश्य आमजन को समय पर पट्टा उपलब्ध कराना पिछड़ता नजर आ रहा है।

आमजन पूछ रहे हैं – सुविधा की जगह परेशानी क्यों?

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले करीब पांच माह से नगर पालिका प्रशासक के अधीन संचालित हो रही है, लेकिन पट्टा, नामांतरण और अन्य नागरिक सेवाओं को लेकर लोगों की समस्याओं का अपेक्षित समाधान नहीं हो पा रहा है। कई मामलों में शिकायतें उच्चाधिकारियों तक पहुंच रही हैं, जबकि समाधान के बजाय विवाद बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। नगर पालिका में यदि आम नागरिक और अधिकारी एक-दूसरे के खिलाफ पुलिस में शिकायतें दर्ज कराने लगें तो इससे व्यवस्था पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। ऐसे में लोगों का मानना है कि प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लानी चाहिए ताकि दोषी के विरुद्ध कार्रवाई हो सके और आमजन का विश्वास प्रशासन पर बना रहे।

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