आराजी नंबर 62 – पालिका अपना हक भूलकर भूमाफियाओं को बांटे करोड़ों की जमीन के पट्टे

आराजी नंबर 62 - पालिका अपना हक भूलकर भूमाफियाओं को बांटे करोड़ों की जमीन के पट्टे

आराजी नंबर 62 का मामला, लोगों की नजर से बचाने के लिए अलवर संस्करण में प्रकाशित करवाई उजरदारी सूचना

Bhinder@VatanjayMedia

भीण्डर नगर पालिका जिस जमीन पर अपना हक जता करके वर्षों से न्यायालय के चक्कर काट रही थी, उस जमीन को वर्तमान नगर पालिका अधिशाषी अधिकारी, कर्मचारी, पालिका अध्यक्ष ने आपसी राय करके चंद रूपये जमा करके भूमाफियाओं को पट्टे बांट दिये।

जबकि उक्त जमीन मास्टर प्लान में उद्यान, खुले स्थान व खेल मैदान के लिए आरक्षित है। इस प्रक्रिया की भनक जनता को नहीं लगे, इसके लिए नगर पालिका ने उक्त जमीन की उजरदारी सूचना अलवर संस्करण के समाचार पत्र में प्रकाशित करवाई।

वहीं दूसरी और पालिका द्वारा 1983 में जारी एक पट्टें का बंटवारा करके नवीन पट्टे बनवाने के लिए एक परिवार पिछले दो वर्ष से पालिका के चक्कर काट रहा है। लेकिन ये अधिकारी इस परिवार की नहीं सुनकर रोजाना कार्यालय के चक्कर कटवा रहे है। आखिर ये नगर पालिका केवल भूमाफियां और जेब भरने वालों के ही काम करेंगे, आम आदमी केवल पालिका के चक्कर ही काटेंगे।

पहली उजरदारी सूचना पर लगी आपत्ति तो दूसरी बार अलवर में करवाई प्रकाशित

भीण्डर नगर पालिका में भीण्डर निवासी मुख्तियार मोहम्मद पिता हाजी मोहम्मद हुसैन ने भीण्डर-उदयपुर रोड स्थित राड़ाजी बावजी स्थानक के निकट स्थित कृषि भूमि को आवासीय प्रयोजन के लिए परिवर्तन करने के लिए फाइल प्रस्तुत की।

जिस पर पालिका ने 5 जुन 2025 को उदयपुर संस्करण के समाचार पत्र में उजरदारी सूचना प्रकाशित करके आराजी नंबर 62 की कुल 6 बीद्या 7 बिस्वा जमीन में से 53 हजार 307 वर्गफीट जमीन कृषि से बदलकर आवासीय करनी थी।

लेकिन उस समय पूर्व पालिकाध्यक्ष व पार्षद गोवर्द्धनलाल भोई ने दिनांक 26 जून 2025 को आपत्ति दर्ज करवा करके आराजी नंबर 62 की जमीन नगर पालिका भीण्डर के वर्तमान मेें लागू मास्टर प्लान के तहत उद्यान, खुले मैदान व खेल मैदान के लिए आरक्षित है। उक्तभूूमि के गेर कृषि प्रायोजनार्थ में बदलने के लिए हाईकोर्ट में दायर याचिका गुलाब कोठारी बनाम राजस्थार सरकार के निर्णय में सख्त निर्देश हैं कि मास्टर प्लान में जिस जमीन को जिस प्रायोजनार्थ कर रखी हैं उसको 2031 तक किसी भी प्रकार से परिवर्तित नहीं किया जा सकता है। इसलिए उक्त जमीन का आवासीय में भू-परिवर्तन नहीं हो सकता है।

इसके बाद पालिका ने 15 अगस्त 2025 को अलवर संस्करण के समाचार पत्र में इसी जमीन की उजरदारी प्रकाशित कर दी, ताकि किसी भी आपत्ति नहीं लगे। इसके बाद पालिका ने 23 जनवरी को राशि जमा करके पट्टे वितरित कर दिये।

6 माह तक ठंडे बस्ते में रखकर बांट दिये पट्टे

भीण्डर नगर पालिका ने आराजी नंबर 62 पर आपत्ति लगने के बाद अगस्त में दूसरी बार उजरदारी सूूचना जारी करके भू-परिवर्तन के कार्य को ठंडे बस्ते में डाल दिया। लेेकिन जैसे ही बोर्ड के अंतिम दिन नजदीक आने लगे तो वर्तमान नगर पालिका अधिशाषी अधिकारी जितेन्द्र मीणा, नगर पालिका अध्यक्ष निर्मला भोजावत, भूमि शाखा इंचार्ज भगवतीलाल प्रजापत सहित अन्य कर्मचारी एवं कमेटी सदस्यों ने भूमि मालिक व भूमाफियाओं से मिलीभगत करके उक्त जमीन के पट्टे जारी कर दिये।

इसको लेकर नगर पालिका के खाते में दिनांक 13 जनवरी 2026 को जमीन मालिक द्वारा 66 लाख 25 हजार 258 रूपये भी जमा करवाएं गये। वहीं आंशका जताई जा रही हैं कि नियम विरू़द्ध किये गये इस कार्य के लिए जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों व कर्मचारियों की जेब भी करोड़ों से गर्म की गई है।

उक्त जमीन के लिए पालिका स्वयं लड़ रही थी केस

जिस आराजी नंबर 62 की जमीन के पट्टे पालिका ने बांटे, उक्त जमीन के लिए वर्षों से न्यायालय में अपनी जमीन होने का दावा नगर पालिका पेश करती आ रही है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इस मामलेे पर नगर पालिका ने न्यायालय से रूख मोड़ करके अपनी पैरवी को कमजोर कर दिया।

इसके बाद उक्त जमीन के मालिक ने भू-परिवर्तन के लिए फाइल लगवा दी और पालिका ने भी बिना कोई आपत्ति राशि जमा करके पट्टे भी जारी कर दिये। इससे साफ जाहिर हो रहा हैं कि वर्तमान अध्यक्ष निर्मला भोजावत सहित बोर्ड सदस्य एवं अधिकारी व कर्मचारी ने मिलकर पालिका के हक की जमीन काो भूमाफियाओं के नाम पर बिना रोक-टोक के जाने दी।

दूूसरी और आम आदमी दो वर्ष से काट रहा हैं चक्कर

भीण्डर नगर पालिका ने वर्ष 1983 में भेरूलाल मोची के नाम 900 वर्गफीट का आवासीय पट्टा जारी किया था। भेरूलाल मोची के पुत्र मोहनलाल, नारायणलाल एवं जगदीशलाल ने इस भूखण्ड से अपने-अपने हिस्से में आएं जमीन के लिए नगर पालिका में करीब 2 वर्ष पहले पूराने पट्टे को समर्पित करके तीनों के नाम अलग-अलग पट्टे जारी करने का आवेदन किया।

लेकिन नगर पालिका पिछले दो वर्ष से इस परिवार को चक्कर कटवा रही हैं लेकिन पट्टा जारी नही ंकर रही है। आखिर सवाल ये उठता हैं कि एक तरफ जहां करोड़ों की जमीन के लिए नगर पालिका नियम को ताक पर रख करके पट्टे जारी कर देती हैं तो दूसरी तरफ नियम से पट्टे का बंटवारा करके नये पट्टे जारी करने हैं उसमें आम आदमी को दो वर्ष से चक्कर ही कटवाएं जा रहे है।

ईओ-अध्यक्ष के फोेन बंद

इस मामले को लेकर जब नगर पालिका अधिशाषी अधिकारी जितेन्द्र मीणा व नगर पालिका अध्यक्ष निर्मला भोजावत का पक्ष जानने के लिए फोन किया गया तो दोनों के फोेन बंद मिले। वहीं अन्य कर्मचारियों ने इस मामले में बोलने से इंकार कर दिया।

इनका कहना

भीण्डर नगर पालिका में जब से निर्मला भोजावत अध्यक्ष निर्वाचित हुई हैं उसके बाद से पालिका पर भूमाफियाओं का ही बोलबाला है। यहां पिछले 5 वर्षों में आम आदमी की कोई भी सुनवाई नहीं है। इस मामले ये ही साफ जाहिर हो रहा हैं कि रूपये देने वालों के लिए नियम भूल जाते हैं और आम आदमी के लिए नियमों का पहाड़ खड़ा कर देते है।

अधिशाषी अधिकारी व कर्मचारी नगर पालिका को अपनी जागिरदारी समझ करके सरकार व न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करके अपनी मनमर्जी से पट्टेे व निर्माण स्वीकृतियां जारी कर रहे है। इस मामले को लेकर विधायक उदयलाल डांगी से मांग करता हूं कि एसीबी से जांच करके दोषी कर्मचारी व जनप्रतिनिधि के खिलाफ कार्यवाही की जाएं।

-गोवर्द्धनलाल भोई, पूर्व पालिकाध्यक्ष व पार्षद नगर पालिका भीण्डर

एसओजी या एसीबी की जरूरत पड़ी तो उनसे करवायेंगे जांच – विधायक

भीण्डर नगर पालिका में जिस प्रकार जमीनों के पट्टे देने के मामले सामने आएं है। इससे साफ जाहिर हो रहा हैं कि भ्रष्ट्राचार किस प्रकार फैलाया जा रहा है। वहीं अलवर संस्करण में उजरदारी सूचना प्रकाशित करना अपने आप में भ्रष्ट्राचार उजागर होता दिख रहा है।

हमारी सरकार भ्रष्ट्राचार के खिलाफ सख्त हैं मैंने मुख्यमंत्री सेे मांग कर रखी हैं और इस प्रकार के मामलों की जांच के लिए एसओजी या एसीबी टीम गठित करवानी होगी तो वो भी करवा करके निष्पक्ष जांच करके दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करवायेंगे।

-उदयलाल डांगी, विधायक वल्लभनगर

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