आठ दिवसीय सिद्ध चक्र आराधना की पूर्णाहुति, विश्व शांति महायज्ञ के साथ समापन

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Bhinder@VatanjayMedia

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भीण्डर में जैन समाज के चल रहे अष्टांहिक महापर्व का विश्वशांति महायज्ञ के साथ समापन हुआ। सकल दिगम्बर जैन समाज के प्रवक्ता इन्द्र लाल फान्दोत ने बताया कि धर्मनगरी भींडर में अष्टांहिक महापर्व पर चल रहे सिद्ध चक्र विधान का विश्वशांति महायज्ञ और शनिवार को तपस्वीयों के पारणा के साथ सानंद समापन हुआ।

यह आयोजन मुनि अपूर्वसागर महाराज, मुनि अर्पितसागर महाराज, मुनि विवर्जितसागर महाराज के सान्निध्य और पण्डित अरविंद जैन रामगढ़ और नमन भैया के निर्देशन में चल रहा इस विधान के अंतिम दिन सिद्ध परमेष्ठी के 1024 गुणों की पूजा की गई।

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अन्तिम दिवस पर इन्द्रलाल शान्तिलाल फान्दोत, सुलोचना देवी फान्दोत एवं सभी इन्द्र इंद्राणियो एवं सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं के उपस्थिति में श्रीजी का स्वर्ण कलश से पंचामृत अभिषेक का सौभाग्य ललित कुमार अनिता देवी बोहरा परिवार और स्वर्ण कलश से श्रीजी की शान्ति धारा विमल कुमार लिखमावत, प्रकाशचन्द्र धर्मावत परिवार ने की।

मुनिश्री संघ के पाद प्रक्षालन नाना लाल, जयंती लाल, निलेश कुमार बोहरा परिवार एवं जिनवाणी भेंट श्रीपाल हाथी कमला देवी परिवार ने की।
सैकड़ो जिन भक्त सिद्धचक्र महामंडल विधान के दिन सिद्ध भगवान के 1024 गुणों के अर्घ्य विधान पर चढ़ाए गए, पूरे विधान में द्रव्य सामग्री पुण्यार्जक पारसमल, मुकेश, महावीर पचौरी थे।

आचार्य भगवंत वर्धमान सागर महा मुनिराज एवं भींडर में विराजित मुनि अपूर्व सागर महाराज ,मुनि अर्पित सागर महाराज, मुनि विवर्जित सागर महाराज के मंगल आशीर्वाद से 8 इन्द्राणियो ने इस गर्मी में 8 उपवास किया जिनका आज समाज ने अभिनंदन किया- कमला देवी हाथी,अनीता बोहरा,रेखा कण्ठालिया, कल्पना कण्ठालिया, ममता धर्मावत, किरण धर्मावत, चंदा धर्मावत, मंजू डुंगरिया, कमला बाई हाथी, अष्टांहिक व्रत रेखा वनावत सहित 13 महिलाओ ने व्रत किए ।

उपवास करने वालो तपस्वियो की शोभायात्रा बैंड बाजों एवं बग्गियों में निकाली गई अन्तिम दिवस पर सभी इन्द्र इंद्रानियो ने मंत्रोच्चार से हवन कर पूर्ण आहुति की । आज समाज ने मुनिसंघ को 2025 का चातुर्मास भींडर में करने के लिए सैंकड़ों श्रावक श्राविकाओ ने श्री फल चढ़ाया एवं चारित्र चक्रवती आचार्य शान्ति सागर महाराज के आचार्य पदारोहण के शाताब्दी वर्ष में भींडर में आचार्य शान्ति सागर सभागार बनवाने की स्वीकृति श्रीपाल विमला देवी धर्मावत परिवार ने की। भगवान जिनेन्द्र को शोभायात्रा के साथ मंदिर में विराजमान किया।

मुनि श्री ने अंतिम दिन प्रवचन में सिद्ध परमेष्ठि की महिमा को बताया और विधान में भाग लेने वाले, आयोजकों को और पूरे समाज को आशीर्वाद दिया। स्थानीय समाज ने सौधर्म इंद्र इंद्राणी श्रीमती सुलोचना शांतिलाल फांदोत सहित पारसमल जी पचोरी आदि सभी इंद्रों और 8 उपवास करने वाली महिलाओं का शाल, श्रीफल और प्रशस्ति पत्र दे कर सम्मान किया। जिसमें मुनि अपूर्वसागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि धरियावद में विराजित परम उपकारी गुरुवर्य आचार्य वर्धमानसागर महाराज ने भी सभी सिद्ध चक्र विधान में इन्द्र इन्द्रणियों के लिए और पुरी जैन एवं सभी समाज के लिए मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।

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