जैन मुनि प्रशम सागर महाराज को जन्मभूमि भीण्डर में दी श्रद्धांजलि….

जैन मुनि प्रशम सागर महाराज को जन्मभूमि भीण्डर में दी श्रद्धांजलि....

भीण्डर में हुआ था जन्म, स्वास्थ्य सुविधाओं में दे चुके हैं सेवाएं

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Bhinder@VatanjayMedia

जैन मुनि प्रशम सागर महाराज ने सोमवार को धरियावद में समाधिलीन हो गये थे। इस पर उनकी जन्मभूमि भीण्डर में मंगलवार को श्रद्धांजलि सभा का आयोजन रखा गया।

समाज प्रवक्ता इन्द्र लाल फान्दोत ने बताया कि आचार्य वर्धमान सागर महाराज के परम शिष्य मुनि प्रशम सागर महाराज का सोमवार को धर्मनगरी धरियावद में समाधिलीन हो गये।

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प्रशम सागर महाराज का गृहस्थ जीवन का नाम चांदमल बोहरा कम्पाउंडर साहब था। भींडर में जन्मे थे एवं उदयपुर में प्रवासी थे, कम्पाउंडर के सेवा कार्य को बहुत ही श्रेष्ठ बनाया एवं समाज की सेवा की गृहस्थ जीवन में गुरुजनों की सेवा व सानिध्य में रहकर ज्ञान, वैराग्य प्राप्त किया गृहस्थ जीवन में भी उदासीन वृत्ति से रहते थे।

आचार्य वर्धमान सागर की प्रेरणा से 75 वर्ष की आयु में निग्रंथ मुनि दीक्षा तीर्थ राज सम्मेद शिखर सिद्ध क्षेत्र पर शिक्षा दीक्षा सिद्धहस्त गुरुवर्य आचार्य वर्धमान सागर महाराज से सन्यास धारण कर लिया। सोमवार को शारीरिक अस्वस्थता को देखते हुए धरियावद में चारों प्रकार के आहार-पानी का त्याग कर यम सल्लेखना धारण कर समता भाव से अपनी देह का त्याग कर स्वर्गारोहण प्राप्त किया।

इसको लेकर मंगलवार को भीण्डर स्थित आदिनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मन्दिर में मुनि अपूर्व सागर महाराज, मुनि अर्पित सागर महाराज, मुनि विवर्जित सागर महाराज के सानिध्य में समाजजनों ने मुनि प्रशम सागर महाराज को श्रद्धांजलि दी।

सभा में मुनि अपूर्व सागर महाराज ने अपने जीवन के संस्मरण सुनाए कहा कि प्रशम सागर महाराज ज्ञान, ध्यान ,तप में लीन रहते थे संघ के साधुओं की निरन्तर सेवा करते थे भींडर नगर गौरव प्रशम सागर महाराज के दीक्षा के पहले का प्रथम केशलोच मुनि अपूर्व सागर महाराज ने अपने हाथों से हुआ था।

सभा में मुनि अपूर्व सागर महाराज ने वीनयांजलि अर्पित करते हुए कहा कि प्रशम सागर महाराज ने समाधि मरण कर अपने जीवन में चार चांद लगा दिए गृहस्थ जीवन में कम्पाउंडर अवस्था में शरीर का इलाज करते थे मुनि दीक्षा लेकर डॉक्टर बनकर आत्मा का पक्का इलाज कर लिया।

श्रद्धांजलि सभा में अध्यक्ष विमल प्रसाद लिखमावत, उपाध्यक्ष श्रीपाल हाथी, मंत्री विनोद कंठालिया, प्रकाश चन्द्र धर्मावत, मीठा लाल फान्दोत, शान्ति लाल फान्दोत, शान्ति लाल लिखमावत, सौभाग्यमल वक्तावत, रोशन लाल आवोत, सुरेश चन्द्र धर्मावत, मीठा लाल आवोत, राजमल सेठ, राहुल उदयपुरिया, सुलोचना फान्दोत, रेखा वाणवत, बेबी डवारा, निर्मला हाथी, चन्दना पचौरी सहित कई श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित थे।

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