भीण्डर पालिका अध्यक्ष चुनाव में नामांकन के साथ गरमाई सियासत

भीण्डर पालिका अध्यक्ष चुनाव में नामांकन के साथ गरमाई सियासत

कांग्रेस के दो, भाजपा के तीन और एक निर्दलीय ने भरा पर्चा

भाजपा प्रत्याशी के प्रस्तावक बने कांग्रेस पार्षद सैय्यद हुसैन, नामांकन के बाद कांग्रेस की बाड़ाबंदी में लौटे

Bhinder@Vatanjaymedia

भीण्डर नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर भीण्डर की सियासत में नामांकन के अंतिम दिन नया मोड़ देखने को मिला। अध्यक्ष पद के लिए कुल छह नामांकन दाखिल किए गए, जिनमें कांग्रेस से दो, भाजपा से तीन तथा एक निर्दलीय प्रत्याशी ने नामांकन पेश किया।

हालांकि नामांकन प्रक्रिया से ज्यादा चर्चा उस राजनीतिक घटनाक्रम की रही, जिसमें भाजपा प्रत्याशी सुरेश कंठालिया के नामांकन में कांग्रेस के वार्ड 4 से निर्वाचित पार्षद सैय्यद हुसैन प्रस्तावक बने।

सैय्यद हुसैन भाजपा प्रत्याशी के साथ नगर पालिका सभागार पहुंचे और प्रस्तावक के रूप में नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर किए। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे वापस कांग्रेस की बाड़ाबंदी में चले गए।

इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद भीण्डर के राजनीतिक गलियारों में दिनभर तरह-तरह की चर्चाएं चलती रहीं। हालांकि सैय्यद हुसैन के कांग्रेस छोड़ने अथवा भाजपा के साथ जाने की कोई बात सामने नहीं आई है।

कांग्रेस की बाड़ाबंदी में सेंध या महज नामांकन तक सीमित रहा घटनाक्रम?

अध्यक्ष चुनाव में पार्षदों की संख्या को देखते हुए बाड़ाबंदी पहले से ही राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनी हुई है। ऐसे में भाजपा प्रत्याशी के नामांकन में कांग्रेस पार्षद के प्रस्तावक बनने को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा रही कि क्या यह भाजपा की ओर से कांग्रेस की बाड़ाबंदी में सेंधमारी का संकेत है या फिर यह केवल नामांकन प्रक्रिया तक सीमित राजनीतिक व्यवस्था थी।

घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि नामांकन के बाद सैय्यद हुसैन पुनः कांग्रेस की बाड़ाबंदी में चले गए। इसी घटनाक्रम ने एक और राजनीतिक सवाल को जन्म दिया है कि क्या अध्यक्ष चुनाव को लेकर पर्दे के पीछे नए राजनीतिक समीकरण तैयार हो रहे हैं?

डांगी और शक्तावत के साथ आने की चर्चा ने बढ़ाई सियासी गर्मी

नामांकन के दौरान सामने आए इस घटनाक्रम को भीण्डर की स्थानीय राजनीति के व्यापक परिदृश्य में भी देखा जा रहा है। भाजपा के विधायक उदयलाल डांगी और कांग्रेस की पूर्व विधायक प्रीति गजेन्द्र सिंह शक्तावत अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर किसी मुद्दे पर एक-दूसरे के करीब आते हैं तो उसका असर भीण्डर की राजनीति पर पड़ना स्वाभाविक है।

हालांकि दोनों नेताओं के बीच पालिका अध्यक्ष चुनाव को लेकर किसी औपचारिक गठजोड़ की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कांग्रेस पार्षद का भाजपा प्रत्याशी के नामांकन में प्रस्तावक बनना और उसके बाद कांग्रेस की बाड़ाबंदी में लौटना इस चर्चा को जरूर हवा दे रहा है कि क्या किसी स्तर पर राजनीतिक संवाद या स्थानीय समीकरण बने है।

इस घटनाक्रम को पूर्व विधायक रणधीर सिंह भीण्डर की स्थानीय राजनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। रणधीर सिंह भीण्डर भाजपा का बोर्ड बनाने के लिए सक्रिय हैं और भाजपा के निर्वाचित पार्षदों को अपने साथ लेकर अध्यक्ष पद की रणनीति बनाने में जुटे हैं।

ऐसे में यदि उनके सामने कोई नया राजनीतिक समीकरण खड़ा होता है तो इसका सीधा असर पालिका अध्यक्ष के चुनाव पर पड़ सकता है। राजनीतिक जानकारों के बीच यह चर्चा भी है कि भीण्डर की स्थानीय राजनीति में रणधीर सिंह भीण्डर के प्रभाव को चुनौती देने के लिए अलग-अलग राजनीतिक धड़े अपने-अपने स्तर पर समीकरण साधने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि इसे फिलहाल राजनीतिक विश्लेषण और चर्चा के तौर पर ही देखा जा रहा है।

25 पार्षदों में कांग्रेस के 13, भाजपा के 12

भीण्डर नगर पालिका के चुनाव परिणामों के बाद अध्यक्ष पद का गणित कांग्रेस के पक्ष में दिखाई दे रहा है। पालिका के कुल 25 वार्डों में से कांग्रेस ने 13 और भाजपा ने 12 वार्डों में जीत दर्ज की है। इस लिहाज से कांग्रेस के पास बहुमत का आंकड़ा मौजूद है। कांग्रेस की ओर से सुंदरलाल लिखमावत को पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी बनाया गया है। वहीं भाजपा में तीन दावेदारों के नामांकन से मुकाबला रोचक हो गया है। हालांकि अध्यक्ष चुनाव में पार्टी के आंकड़ों के साथ-साथ पार्षदों की व्यक्तिगत निष्ठा, राजनीतिक समीकरण और अंतिम समय में होने वाले निर्णय भी महत्वपूर्ण होंगे।

कांग्रेस से दो नामांकन, सुंदरलाल अधिकृत प्रत्याशी

कांग्रेस की ओर से अध्यक्ष पद के लिए सुंदरलाल लिखमावत और गोपाल चौबीसा ने नामांकन दाखिल किया। पार्टी ने सुंदरलाल लिखमावत को अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। नामांकन के दौरान पूर्व विधायक प्रीति गजेन्द्र सिंह शक्तावत, कांग्रेस पार्षद प्रत्याशी राजेश आमेटा, युवराज सिंह शक्तावत, राजेश जैन सहित अन्य कांग्रेस नेता मौजूद रहे। कांग्रेस के सामने अब चुनौती अपने 13 पार्षदों को एकजुट रखने की है। पार्टी के पास संख्या बल होने के बावजूद अध्यक्ष चुनाव के अंतिम चरण तक सभी पार्षदों को साथ रखना उसके लिए अहम माना जा रहा है।

भाजपा से तीन नामांकन, चमनलाल ने निर्दलीय भरा पर्चा

भाजपा की ओर से सुरेश कंठालिया, गणेश नागदा और मीना सामरिया ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया। सुरेश कंठालिया के नामांकन के दौरान भाजपा नेता नरेन्द्र सिंह आसौलिया के साथ कांग्रेस पार्षद सैय्यद हुसैन की मौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया। वहीं भाजपा के वार्ड 18 से निर्वाचित पार्षद चमनलाल सोनी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन एवं गणेश नागदा मीना सामरिया द्वारा भाजपा से नामांकन दाखिल किया। इन तीनों के नामांकन के दौरान पूर्व विधायक रणधीर सिंह भीण्डर, पार्षद जितेन्द्र साहु, मगनीराम रेगर, नंदलाल अहीर, पुष्कर साहु, सुशील जैन, सुरेन्द्र मीणा, किशनलाल अहीर, गोपाल चौबीसा, महेन्द्र लखकार, प्रकाश चौबीसा आदि उपस्थित थे।

भाजपा बाड़ाबंदी – पूर्व विधायक के खेमे में 11 पार्षद, विधायक खेमे में एक

पालिका चुनाव में भाजपा के 12 पार्षद निर्वाचित हुए हैं। इनमें से 11 पार्षद पूर्व विधायक रणधीर सिंह भीण्डर की बाड़ाबंदी में बताए जा रहे हैं, जबकि एक पार्षद विधायक उदयलाल डांगी की बाड़ाबंदी में है। ऐसे में भाजपा के भीतर भी अध्यक्ष पद के लिए अलग-अलग राजनीतिक समीकरण दिखाई दे रहे हैं। तीन भाजपा प्रत्याशियों और एक भाजपा पार्षद के निर्दलीय नामांकन के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अंतिम समय में पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी कौन बनकर सामने आता है और अन्य दावेदार किस तरह की भूमिका निभाते हैं।

कांग्रेस के 13 और भाजपा के 12 के बीच एक-एक वोट महत्वपूर्ण

पालिका में कांग्रेस के पास 13 पार्षद हैं और भाजपा के पास 12। सामान्य गणित कांग्रेस के पक्ष में है, लेकिन अध्यक्ष चुनाव की राजनीति केवल संख्या तक सीमित नहीं है। यदि कांग्रेस अपने सभी 13 पार्षदों को एकजुट रखती है तो उसके अधिकृत प्रत्याशी के सामने रास्ता साफ हो सकता है। वहीं भाजपा के लिए चुनौती अपने 12 पार्षदों को एकजुट रखने के साथ-साथ अध्यक्ष पद के लिए खड़े हुए अलग-अलग दावेदारों के बीच सहमति बनाकर एक प्रत्याशी को तय करती हैं तो उनके 12 पार्षद के मत मिल सकते है। हालांकि एक पार्षद का निर्णय भी पूरे चुनाव का रुख प्रभावित कर सकता है।

अब नजर बाड़ाबंदी पर, अंतिम समय में क्या होगा?

नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही अब दोनों प्रमुख दलों की नजर अपने-अपने पार्षदों पर है। कांग्रेस जहां अपने 13 पार्षदों को एकजुट रखने की कोशिश करेगी, वहीं भाजपा अपने 12 पार्षदों के दम पर बहुमत के आंकड़े को चुनौती देने की रणनीति बनाएगी।

सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि नामांकन के अंतिम दिन सामने आए सैय्यद हुसैन-सुरेश कंठालिया प्रकरण ने अध्यक्ष चुनाव को केवल कांग्रेस बनाम भाजपा की सीधी लड़ाई से आगे बढ़ाकर व्यक्तिगत और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों की चर्चा तक पहुंचा दिया है।

सवाल यह भी है कि किसकी बाड़ाबंदी मजबूत रहती है, कौन अंतिम समय तक अपने पार्षदों को साथ रख पाता है और भीण्डर की स्थानीय राजनीति में किस खेमे का प्रभाव बढ़ता है। अध्यक्ष पद का चुनाव अब नामांकन से निकलकर सियासी रणनीति, बाड़ाबंदी और अंतिम समय के समीकरणों के दौर में प्रवेश कर चुका है।

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